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Sharad Purnima 2025: खीर रखने का शुभ मुहूर्त, पूजा विधि, महत्व और कोजागरी पूर्णिमा का रहस्य

byaditya142d agoभारत
Sharad Purnima 2025: खीर रखने का शुभ मुहूर्त, पूजा विधि, महत्व और कोजागरी पूर्णिमा का रहस्य

Sharad Purnima 2025: चाँदनी में बसी अमृत बरसात जानिए कब करें खीर पूजा, क्या है इसका आध्यात्मिक और वैज्ञानिक रहस्य

हर साल शरद ऋतु की पूर्णिमा रात को आसमान कुछ और ही दिखाई देता है — शांति, चमक और चाँदी-सी रोशनी से भरा। इस बार Sharad Purnima 2025 यानी कोजागरी पूर्णिमा का पर्व 6 अक्टूबर (सोमवार) को मनाया जाएगा।

कहते हैं, इस रात की चाँदनी में “अमृत तत्व” बसता है — जो तन और मन दोनों को स्वस्थ और शांत करता है। इसी दिन लोग दूध-चावल की खीर बनाकर चाँदनी में रखते हैं, ताकि उसमें अमृत की ऊर्जा समा सके।

कब है शरद पूर्णिमा 2025 का शुभ मुहूर्त

हिंदू पंचांग के अनुसार, पूर्णिमा तिथि 6 अक्टूबर 2025 को दोपहर 12:23 बजे शुरू होकर 7 अक्टूबर को सुबह 9:16 बजे समाप्त होगी

चाँद का उदय इस दिन लगभग शाम 5:33 बजे होगा, और लक्ष्मी पूजा (कोजागरी व्रत) का निशीथ काल (मध्यरात्रि मुहूर्त) रात 12:03 से 12:52 बजे के बीच रहेगा।

पंडितों के अनुसार, इस अवधि में पूजा करने से विशेष फल प्राप्त होते हैं, क्योंकि यही वह समय होता है जब चंद्रमा पृथ्वी के सबसे निकट होता है और उसकी किरणों में औषधीय शक्ति चरम पर होती है।

शरद पूर्णिमा का धार्मिक महत्व

शरद पूर्णिमा का अर्थ है — “शरद ऋतु की पूर्णता।” यह वह रात है जब भगवान विष्णु और देवी लक्ष्मी की संयुक्त आराधना की जाती है।

माना जाता है कि इस दिन मां लक्ष्मी धरती पर आती हैं और देखती हैं कि कौन जाग रहा है। इसीलिए इसे “कोजागरी” या “को जागरा?” (कौन जाग रहा है?) पूर्णिमा कहा जाता है।

इस दिन जो व्यक्ति पूरी रात जागरण करता है और भक्ति में लीन रहता है, उस पर देवी लक्ष्मी की विशेष कृपा होती है। धन-समृद्धि के साथ घर में सुख-शांति बनी रहती है।

ब्रज क्षेत्र में इसे रास पूर्णिमा कहा जाता है, क्योंकि मान्यता है कि इसी रात भगवान कृष्ण ने रासलीला की थी — जब ब्रज की गोपियाँ दिव्य संगीत में खोकर ईश्वर से एकाकार हो गई थीं। यह प्रेम और भक्ति के मिलन का प्रतीक माना जाता है।

खीर रखने की परंपरा — आस्था और विज्ञान का संगम

शरद पूर्णिमा की सबसे प्रसिद्ध परंपरा है खीर बनाकर उसे चाँदनी में रखना।

खीर — जो दूध, चावल और चीनी से बनती है — को चाँद की किरणों में पूरी रात रखा जाता है। सुबह उसे प्रसाद के रूप में ग्रहण किया जाता है।

इस परंपरा के दो पहलू हैं:

  1. आध्यात्मिक रूप से, यह समर्पण और पवित्रता का प्रतीक है — जैसे चाँद सबको समान रूप से अपनी रोशनी देता है, वैसे ही हम सबको प्रेम और दानभाव से जोड़ना चाहिए।
  2. वैज्ञानिक रूप से, शरद की ठंडी रातों में जब चाँद पृथ्वी के पास होता है, उसकी किरणों में यूवी और इंफ्रारेड ऊर्जा का अनुपात संतुलित होता है, जो शरीर की प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाता है।
  3. आयुर्वेद भी मानता है कि इस रात खीर में चाँदनी का संचार “शीतल और रोगनाशक” गुण भर देता है।

पूजा विधि: कैसे करें लक्ष्मी और चंद्र देव की आराधना

  1. सुबह स्नान कर के व्रत का संकल्प लें।
  2. घर की साफ-सफाई करें और पूजा स्थान पर लक्ष्मी-विष्णु की मूर्ति स्थापित करें।
  3. शाम को घी का दीपक जलाएं और चावल-दूध की खीर तैयार करें।
  4. चाँद निकलने पर उसे खुले आसमान के नीचे रखें।
  5. “ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं महालक्ष्म्यै नमः” मंत्र का जाप करें।
  6. रात में भजन-कीर्तन करें और मन को सकारात्मक विचारों में लगाएं।
  7. सुबह उस खीर को परिवारजनों और जरूरतमंदों में बांटें।

राशि अनुसार लाभ और प्रभाव

ज्योतिष के अनुसार, इस वर्ष शरद पूर्णिमा की चाँदनी वृषभ, कन्या, तुला और मकर राशि वालों के लिए अत्यंत शुभ रहेगी।

  1. वृषभ राशि के जातकों को धन लाभ और कारोबार में प्रगति होगी।
  2. कन्या राशि वालों को मानसिक शांति और पारिवारिक संतुलन मिलेगा।
  3. तुला राशि के लिए यह रात रिश्तों में मिठास लाएगी।
  4. मकर राशि वालों के लिए स्वास्थ्य सुधार और नई जिम्मेदारियों में सफलता का योग रहेगा।

मानसिक और स्वास्थ्य लाभ

शरद पूर्णिमा की रात को छत पर बैठकर चाँद को निहारना और ध्यान लगाना मन को अत्यधिक शांति देता है।

कई मनोवैज्ञानिक मानते हैं कि यह एक प्रकार की “moon therapy” है — जो चिंता, नींद की समस्या और तनाव को कम करती है।

डॉ. सीमा अग्रवाल, आयुर्वेद विशेषज्ञ (जयपुर), कहती हैं —

“शरद पूर्णिमा की चाँदनी शरीर को ठंडक देती है और मस्तिष्क को स्थिर करती है। यदि कोई नियमित रूप से इस रात की चाँदनी में कुछ मिनट ध्यान करे, तो उसका मानसिक संतुलन बेहतर होता है।”

लोककथाएँ और परंपराएँ

पूर्वी भारत में इस दिन कोजागरी लक्ष्मी पूजा बड़े उत्साह से मनाई जाती है। बंगाल और ओडिशा में महिलाएं रातभर दीप जलाकर मां लक्ष्मी का स्वागत करती हैं।

मिथिला क्षेत्र में इसे ‘कोजागरा पर्व’ कहा जाता है, जहाँ नवविवाहित जोड़े विशेष पूजा करते हैं ताकि वैवाहिक जीवन सुखमय रहे।

उत्तर भारत में यह दिन किसानों के लिए भी खास है — क्योंकि फसल पकने की शुरुआत इसी मौसम से होती है। किसान इसे “धन-लक्ष्मी का आगमन” मानकर भूमि की पूजा करते हैं।

आध्यात्मिक संदेश: जागृति की रात

शरद पूर्णिमा हमें सिखाती है — जीवन में जागृत रहना ही असली साधना है।

“को-जागरी” यानी “कौन जाग रहा है?” — यह केवल देवी लक्ष्मी का प्रश्न नहीं, बल्कि आत्मा का आह्वान है।

जो व्यक्ति इस रात आत्म-जागरूक रहता है, वही जीवन में समृद्धि, स्थिरता और आनंद का अनुभव कर सकता है।

निष्कर्ष

Sharad Purnima 2025 केवल एक धार्मिक पर्व नहीं, बल्कि प्रकृति, अध्यात्म, स्वास्थ्य और विज्ञान का संगम है।

यह रात हमें सिखाती है कि चाँदनी जैसी निर्मलता और ठंडक हमारे भीतर भी होनी चाहिए।

तो इस 6 अक्टूबर की रात, जब आसमान में चाँदी सी रोशनी फैले — अपनी खीर रखें, दीप जलाएं और मन को शांत करें।

क्योंकि यही वह रात है जब अमृत बरसता है — और उसे महसूस करने के लिए बस एक जागता हुआ दिल चाहिए।